राज्य स्तर पर तय होगी जिलों के स्वास्थ्य की रैकिंग ‘मिसाल’ सिस्टम से होगी डिस्टि्रक्ट हैल्थ रैकिंग

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राज्य स्तर पर तय होगी जिलों के स्वास्थ्य की रैकिंग
‘मिसाल’ सिस्टम से होगी डिस्टि्रक्ट हैल्थ रैकिंग

जयपुर, 26 जून। अतिरिक्त मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती वीनू गुप्ता ने मंगलवार को स्वास्थ्य भवन से आयोजित वीडियो कांफ्रेंसिंग में ‘मिसाल’ जिला स्वास्थ्य रैंकिंग का शुभारम्भ किया।  उन्होंने आनलाईन निरीक्षण हेतु निर्मित किये गये ‘राजधरा’ मोबाइल एप की भी लांचिग की। बैठक में जेएसवाई, राजश्री भुगतान सहित विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों की विस्तार से समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किये गये।  

श्रीमती गुप्ता ने बताया कि ‘मिसाल’ डिस्ट्रक हैल्थ रैंकिंग सिस्टम के माध्यम से मातृ, नवजात, शिशु स्वास्थ्य सूचकांक, पूर्ण टीकाकरण कवरेज, मरीजों की संतुष्टि, संस्थागत प्रसवों का प्रतिशत, प्रसव पूर्व जांच का कवरेज, परिवार कल्याण कार्यक्रम, भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना, टीबी सहित विभिन्न मापदण्डों पर जिले का स्कोर कार्ड तैयार किया जायेगा। साथ ही राजकीय चिकित्सा संस्थानों पर दवाओं, जांच की उपलब्धता, चिकित्सक की उपस्थिति, अधिकारियों द्वारा की जाने वाली आनलाईन मॉनीटरिंग, मेडिकल मोबाईल यूनिट्स शिविरों आदि मापदण्डों पर संस्थान को परखा जायेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से वहां के स्वास्थ्य केन्द्रों में सुधार होगा एवं संबंधित अधिकारियों में परस्पर सहयोग की भावना विकसित होगी।

अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बताया कि मई माह में तैयार डिस्टि्रक्ट हैल्थ रैंकिंग में सीकर जिले ने प्रथम स्थान, अजमेर ने द्वितीय एवं श्रीगंगानगर जिले ने तृतीय स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने इस उपलब्धि पर तीनों जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को बधाई देते हुये कम उपलब्धि वाले जिलों को इनसे प्रेरणा लेते हुये कार्य का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि जिला वार तैयार की जाने वाली रैंकिंग के आधार पर ही प्रत्येक माह जिलों में जिला कलक्टर की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में समीक्षा की जायेगी। 

स्वास्थ्य सचिव एवं मिशन निदेशक एनएचएम श्री नवीन जैन ने बताया कि प्रत्येक ब्लॉक, चिकित्सा संस्थान पर सभी उपलब्ध गतिविधियों की गहनता से मानिटरिंग किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कई बार एक ब्लाक या किसी एक संस्थान के कारण पूरे जिले की प्रगति कमजोर पड़ जाती है। उन्होंने बताया कि प्रसव पूर्व जांच का पंजीकरण, जांच, उनकी आनलाईन एंट्री, डिलेवरी, उसकी लाईनलिस्टिंग, टीकाकरण, अपडेशन सभी गतिविधियां एक-दूसरे से जुड़ी हुयी हैं। एक गतिविधि नहीं होने से आगे की सभी गतिविधियों पर असर दिखता है और उस ब्लाक या संस्थान का स्कोरकार्ड खराब हो जाता है। इसके लिये हरेक गतिविधि की मानिटरिंग कर प्रभावी क्रियान्वयन किया जाना आवश्यक है।

वीडियो कांफ्रेंसिंग में निदेशक जनस्वास्थ्य डा. वीके माथुर, निदेशक आरसीएच डा. एसएम मित्तल, निदेशक एड्स डा. एसएस चौहान सहित संबंधित अधिकारीगण उपस्थित थे। प्रदेश के सभी संयुक्त निदेशक, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी, पीएमओ, बीसीएमओ, बीपीएम भी मौजूद थे।

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